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Press Release
प्रेस विज्ञप्ति
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PRESS RELEASE
Raipur, October 1, 2026 - A Round Table Conference on "The Inspirational Influence of Mahatma Gandhi on Indian Youth" was held today at Kushabhau Thakre University of Journalism and Mass Communication, Raipur. Chairing the session, Vice Chancellor Prof. (Dr.) Manoj Dayal presented three relevant and inspirational Gandhian principles for the youth.He said, first - Education must conquer the mind and senses. True education is not degree-centric, but one that instills fearlessness and self-reliance in youth.Second - Even the poorest must feel, this country is mine. Gandhiji envisioned an India where even the last man in the line feels he has a crucial role in nation-building. Until the youth become the voice of the deprived, Viksit Bharat will remain incomplete.Third - Strike at corruption. Quoting Gandhi's mantra, he said, "The Earth has enough for everyone's need, but not for everyone's greed." A need-based lifestyle, not greed, is the only way for youth to curb corruption today.During the discussion, around 15 students deliberated on linking Gandhian thoughts with start-ups and the digital age. Students discussed at length Gandhi's contribution from his South Africa sojourn to India's independence. A key takeaway from the discussion was that his journey from Barrister to Bapu remains highly inspirational for the youth.The program was attended by Dr. Nripendra Sharma, Head, Department of Electronic Media, Mr. Pankaj Nayan Pandey, Head, Department of Journalism, Dr. Shailendra Khandelwal, Head, Department of Information Technology, Dr. Rajendra Mohanty, Head, Department of Mass Communication, Dr. Vaishali Golap, In-charge, Community Radio 'Samvad', Guest Lecturers Dr. Anil Shukla, Dr. Anamika Sharma, Dr. Hitesh Tiwari, Dr. Jyoti Sharma and a large number of students.
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रायपुर, 25 सितंबर 2026। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय में दीक्षारंभ के तृतीय सत्र में ‘आधुनिक जीवन में अध्यात्म’ विषय पर स्वामी श्री कालिदास जी महाराज ने विशेष व्याख्यान दिया गया।
विश्वविद्यालय के कुलपति मनोज दयाल ने अध्यक्षीय उद्बोधन में नव-प्रवेशित विद्यार्थियों को आधुनिक जीवन में उच्च संस्कारों, नैतिक मूल्यों और शिक्षा के साथ अध्यात्म को जोड़ने के लिए प्रेरित किया। मुख्य अतिथि के रूप में पधारे महामण्डलेश्वर स्वामी श्री कालिदास जी महाराज ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि जीव परमात्मा का एक अंश है। "लिविंग गॉड" माता-पिता हैं, और जो अपने माता-पिता को पहचान लेता है, वह परमात्मा को पहचान लेता है। उन्होंने विद्यार्थियों को मातृ-पितृ सेवा, सत्कार और सम्मान सीखने का संदेश दिया। स्वामी जी ने कहा कि अतिथि का आदर-सत्कार और आचार्य का सम्मान करना हमारा कर्तव्य है। सुख के क्षण क्षणिक होते हैं, जबकि दुख के समय माता-पिता और भाई-बहनों की याद आती है। ईश्वर का नाम स्मरण करते हुए कर्म करने से ही जीवन में सफलता मिलती है। उन्होंने ज्ञान और शिक्षा के महत्व को समझाते हुए कहा कि ज्ञान बांटने से बढ़ता है। ज्ञान और शिक्षा को सत्कर्म तथा सद्भावना के साथ बांटना चाहिए। अपने कर्म का अभिमान करने से व्यक्ति का पतन हो जाता है, इसलिए हमेशा विनम्र रहकर जीना चाहिए। समुद्र की तरह ज्ञानी होने पर भी झुकना और अपने कर्मों को मजबूत रखना चाहिए। विद्यार्थियों के जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए स्वामी श्री कालिदास जी ने कहा कि धर्म और मानवता में से यदि देश को बचाना है, तो यह याद रखना चाहिए कि यदि मानवता नहीं रहेगी, तो धर्म भी सुरक्षित नहीं रहेगा। दान हमेशा सुपात्र को देखकर ही करना चाहिए, कुपात्र को नहीं। गुप्त दान से बड़ा कोई दान नहीं है। उन्होंने अपने संबोधन में आयुर्वेद के महत्व पर भी प्रकाश डाला और कहा कि दया और करुणा ही सच्चे मनुष्य की पहचान है। कार्यक्रम के संयोजक डॉ. आशुतोष मांडवी और मंच संचालन डॉ. चैताली पांडेय ने किया। मुख्य अतिथि का परिचय विद्यार्थी सुषमा अग्रवाल ने किया।कार्यक्रम में डॉ. शैलेन्द्र खंडेलवाल, पंकज नयन पांडे, डॉ राजेन्द्र मोहन्ती, सभी प्राध्यापक, अतिथि प्राध्यापक, बड़ी संख्या में नव-प्रवेशित विद्यार्थी के अलावा नवदीप दलाल और सौरभ मिश्रा का विशेष उपस्थित रहे। डॉ. आशुतोष मंडावी विभागाध्यक्ष (प्रबंधन) एवं संयोजक
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रायपुर, 23 सितम्बर 2026। नव प्रवेशित विद्यार्थियों के 'दीक्षारम्भ' कार्यक्रम में वरिष्ठ संपादक डॉ हिमांशु द्विवेदी ने वर्तमान पत्रकारिता के स्वरूप, उसकी चुनौतियों और युवा पत्रकारों की जिम्मेदारियों पर विस्तार से चर्चा की। अध्यक्षता कुलपति प्रो. (डॉ.) मनोज दयाल ने की।
कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) मनोज दयाल ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि एक पत्रकार के जीवन में उसकी आखिरी स्टोरी और उसकी भाषा ही सबसे महत्वपूर्ण होती है। खबर हमेशा तथ्यात्मक और सही होनी चाहिए। आज के दौर में पत्रकारिता पर अर्थशास्त्र के सिद्धांत हावी हो रहे हैं, जिसके कारण यह अपने मूल उद्देश्यों से भटक रही है। अखबारों पर कई तरह के प्रश्न खड़े हो रहे हैं, ऐसे में आज की युवा पीढ़ी की बड़ी जिम्मेदारी है कि वे पत्रकारिता की विश्वसनीयता को बनाए रखें। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे सनसनीखेज रिपोर्टिंग से दूर रहकर अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनें। दीक्षारम्भ कार्यक्रम के मुख्य अतिथि 'हरिभूमि' के प्रधान संपादक एवं रणनीतिक विश्लेषक डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने कहा कि पिछले दो दशकों में पत्रकारिता में जितना बदलाव आया है, उतना इतिहास में कभी नहीं देखा गया। शुरुआती दौर में पत्रकारिता विचारों को प्रभावी बनाने और समाज के कल्याण के उद्देश्य से शुरू की गई थी, लेकिन आजादी के बाद इसका इस्तेमाल मुनाफे के लिए होने लगा। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज अखबार जनहित के बजाय केवल व्यापार का माध्यम बनकर रह गए हैं। पहले अच्छे पत्रकार को स्थापित होने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ता था, लेकिन आज स्थितियां बदल चुकी हैं। डॉ. द्विवेदी ने नव प्रवेशित विद्यार्थियों से कहा कि अपनी क्षमताओं को पहचानें और खुद का आकलन करें उन्होंने विद्यार्थियों को एक प्रभावी पत्रकार बनने के लिए अध्ययनशील बनने के लिए प्रेरित किया। पढ़ाई को अपने जीवन के अनुशासन का हिस्सा बनाएं। आज के समय में पत्रकारों की विश्वसनीयता कम हुई है और संशय बढ़ा है। इसलिए जल्दबाजी में खबर देने से पहले उसकी सत्यता परखना आवश्यक है। कार्यक्रम में पत्रकारिता विभागाध्यक्ष पंकज नयन पांडेय ने स्वागत भाषण दिया। मुख्य अतिथि डॉ. हिमांशु द्विवेदी का परिचय तारिणी सोनी ने प्रस्तुत किया। मंच संचालन डॉ. केशव राठौर और आभार प्रदर्शन कार्यक्रम संयोजक डॉ. आशुतोष मांडवी ने किया। इस अवसर पर सभी प्राध्यापक, अतिथि व्याख्याता समेत बड़ी संख्या में नव प्रवेशित विद्यार्थी उपस्थित रहे। इसमें हरिभूमि और केटीयू के मध्य मीडिया हाऊस लिकेंज व आपसी सहयोग के लिए एमओयू भी साइन किया गया। डॉ. आशुतोष मंडावी विभागाध्यक्ष (प्रबंधन) एवं संयोजक
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रायपुर, सोमवार, सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ के माननीय राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री रमेन डेका जी ने आज कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर में परिसर का संक्षिप्त प्रवास किया। राज्यपाल श्री डेका जी ने विश्वविद्यालय का अकादमिक मूल्यांकन, गुणवत्ता एवं विकास और छात्र-छात्राओं को उत्तरोत्तर शैक्षणिक उन्नयन के लिए प्रेरित किया। एआई एवं मीडिया शोध केंद्र और नव परिवर्तित सावित्री बाई फुले कन्या छात्रावास का राज्यपाल श्री रमेन डेका जी के कर कमलों से शुभारंभ किया गया। राज्यपाल श्री डेका जी ने विश्वविद्यालय के प्रेरणा स्त्रोत ऋषि तुल्य स्वर्गीय कुशाभाऊ ठाकरे जी की प्रतिमा में श्रद्धा-सुमन अर्पित किये। उन्होंने स्व. ठाकरे जी के सानिध्य में बिताए गए अवसरों और प्रेरणादायी उद्धरणों को साझा किया। राज्यपाल श्री डेका जी ने कहा कि नारी शिक्षा, उत्थान एवं सशक्तिकरण के लिए अनुकरणीय सावित्री बाई फुले जी की स्मृति में कन्या छात्रावास का नामकरण किया गया है। इस सुविधाओं से छत्तीसगढ़ के सुदूर अंचल की छात्राओं को मीडिया शिक्षा में सहायता व सफलता मिलेगी। सूचना-संचार टेक्नॉलाजी क्रांति के दौर में मीडिया रिसर्च के क्षेत्र में आधुनिक प्रविधियों के उन्नयन और प्रोत्साहन के लिए मधुकर खेर मल्टीमीडिया भवन में अवस्थित एआई और मीडिया रिसर्च केंद्र का मान. राज्यपाल के कर कमलों से शुभारंभ किया। सूचना प्रौद्योगिकी विभागाध्यक्ष डॉ शैलेन्द्र खंडेलवाल ने राज्यपाल महोदय को एआई केंद्र की अकादमिक एवं शोध गतिविधियों की जानकारी दी। विश्वविद्यालय के कॉन्फ्रेंस सभा कक्ष में राज्यपाल जी का स्वागत करते हुए कुलपति प्रो डॉ मनोज दयाल ने कहा कि विगत अकादमी सत्र की तुलना में इस वर्ष एडमिशन संख्या में 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो मात्र एक संख्या नहीं लोगों का विश्वास है। कुलपति ने कहा कि हमने एक मंत्र पर काम किया है- "ट्रांसफॉर्मेशन विदाउट ट्रांजैक्शन" अर्थात् न्यूनतम संसाधन में अधिकतम परिवर्तन। हमारी विश्वविद्यालय बहुत छोटी है, परन्तु हम "लघुता में भव्यता" के सूत्र पर कार्यरत हैं। हमारे तीन संकल्प हैं- हर छात्र हुनरमंद होगा, हर छात्र संस्कारयुक्त होगा और यहां कि हर गतिविधि में "राष्ट्र प्रथम" होगा। मीडिया विद्यार्थियों एवं शिक्षकों से संवाद में राज्यपाल श्री डेका जी ने कहा कि पत्रकारिता के छात्र होने के नाते सत्य को उद्घाटित करने की जिम्मेदारी समाज ने आपके कंधों में सौंपी है। मीडिया शिक्षा में आपको पत्रकारिता को प्रभावित करने वाली शक्तियों, टीआरपी, विज्ञापन के दबाव सहित स्लीप ऑप टग्स इत्यादि से होने वाली छोटी-बड़ी ग़लतियों पर ध्यान से अध्ययन करना चाहिए। विद्यार्थियों को भविष्य की अपनी प्रोफेशनल्स लाइफ में आने वाली चुनौतियों से भी बहादुरी से सामना करना है। सोशल मीडिया द्वारा अगंभीर एवं अपुष्ट नकारात्मक खबरों से सामना करना भी आपकी जवाबदेही है। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, एआई और सोशल मीडिया के आधुनिक दौर में भी प्रिंट मीडिया आज भी विश्वसनीय माध्यम समाज में बना हुआ है। राज्यपाल श्री डेका जी ने छात्रों से कहा कि समाज में सभी ओर कुछ-न कुछ मूल्यों और प्रतिमानों में कमी आ रही है। ऐसे समय में पत्रकारिता और मीडिया में फ्रीडम ऑफ स्पीच के मानकों पर ध्यान देना मीडिया विद्यार्थियों के लिए आवश्यक है। एक ब्रिलिएंट और शार्प स्टूडेंट के रूप में आप सेल्फ सेंसर का भी प्रयोग कर सकते हैं। छत्तीसगढ़ में 1900 ई. में पं माधवराव सप्रे जी ने छत्तीसगढ़ मित्र का प्रकाशन किया था। आज का युग मीडिया का है, आप इस चुनौतीपूर्ण प्रोफेशन में आए है तो जनता-समाज के सत्य को सामने लाना आपका लक्ष्य होना चाहिए। राज्यपाल श्री रमेन डेका जी ने असम के एक पत्रकार का उदाहरण देते हुए कहा कि आप भी समाज के अनसंग हीरोज की कहानियों प्रकाशित करें। राज्यपाल जी को कुलपति मनोज दयाल ने स्मृति चिन्ह भेंट की। कार्यक्रम का संचालन डॉ. आशुतोष मंडावी विभागाध्यक्ष प्रबंधन और आभार प्रदर्शन सुनील कुमार शर्मा कुलसचिव ने किया। इस अवसर पर लोक भवन के अधिकारी, विभागाध्यक्ष एवं एसोसिएट प्रोफेसर पंकज नयन पाण्डेय, डॉ शाहिद अली, डॉ राजेंद्र मोहंती, समस्त विभागाध्यक्ष, शिक्षक, अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। विश्वविद्यालय ग्रंथालय में "नारायणी बहुभाषी समाचार पत्र संग्रहालय" की विभिन्न भाषाओं की पत्र-पत्रिकाओं के संकलनों को साहित्यकार डॉ. मृणालिका - राजेंद्र ओझा ने प्रदर्शित किया। प्रदर्शनी का आयोजन इलेक्ट्रॉनिक मीडिया विभागाध्यक्ष डॉ. नृपेंद्र कुमार शर्मा के संयोजन में किया गया। सुनील कुमार शर्मा कुलसचिव
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